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Bhavishya Purana

900.00
जनसमाज में पुराणोक्त भावी घटनाओं के प्रति विशेष आकर्षण है । प्रश्न यह है कि भावी घटनाएँ कहाँ से उत्पन्न हुई , इस पर तर्क करना व्यर्थ है तथा भविष्य पर दृष्टि रखना ज्ञानमय है । पुराण साहित्य , तर्क अथवा प्रमाण द्वारा जाँचने का विषय नहीं है । इनमें घटित घटना या आगे वाली जो घटनाएँ होने की कल्पना की गई है , उन पर ध्यान देना तथा घटित घटना के आधार पर अपने आप को सम्भालना ही विशेष लाभदायक है । क्योंकि इसका निर्माण अल्पशिक्षित या अशिक्षित समुदाय को धर्म , ज्ञान , कर्म , नीति , चरित्र , मर्यादा , सद्व्यवहार सम्बन्धी सर्वकर्मों की प्रेरणा देने के लिए किया गया है । जिन लोगों को कतिपय कारणों से पढ़ने - लिखने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ है , वह लोग भी सत्संग , लीला , कथा , कहानी के द्वारा सुनकर उचित - अनुचित समझकर अच्छाइयों को ग्रहण करने हेतु ; यह पुराण रचा गया है । In the public society, there is a special attraction towards the Puranic future events. The question is that it is pointless to argue on where future events originated, and it is wise to keep an eye on the future. Puranic literature is not a subject to be checked by logic or evidence. It is especially beneficial to pay attention to the events that happened in these or the events that have been imagined to happen in the future and to take care of oneself on the basis of the incident that happened. Because it has been created to inspire the less educated or uneducated community to do all the deeds related to religion, knowledge, action, policy, character, dignity, good behavior. Those people who have not got the privilege of reading and writing due to certain reasons, those people also listen through satsang, leela, katha, story, to accept the good and take it as right and wrong; This Purana has been composed.
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जनसमाज में पुराणोक्त भावी घटनाओं के प्रति विशेष आकर्षण है । प्रश्न यह है कि भावी घटनाएँ कहाँ से उत्पन्न हुई , इस पर तर्क करना व्यर्थ है तथा भविष्य पर दृष्टि रखना ज्ञानमय है । पुराण साहित्य , तर्क अथवा प्रमाण द्वारा जाँचने का विषय नहीं है । इनमें घटित घटना या आगे वाली जो घटनाएँ होने की कल्पना की गई है , उन पर ध्यान देना तथा घटित घटना के आधार पर अपने आप को सम्भालना ही विशेष लाभदायक है । क्योंकि इसका निर्माण अल्पशिक्षित या अशिक्षित समुदाय को धर्म , ज्ञान , कर्म , नीति , चरित्र , मर्यादा , सद्व्यवहार सम्बन्धी सर्वकर्मों की प्रेरणा देने के लिए किया गया है । जिन लोगों को कतिपय कारणों से पढ़ने - लिखने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ है , वह लोग भी सत्संग , लीला , कथा , कहानी के द्वारा सुनकर उचित - अनुचित समझकर अच्छाइयों को ग्रहण करने हेतु ; यह पुराण रचा गया है । In the public society, there is a special attraction towards the Puranic future events. The question is that it is pointless to argue on where future events originated, and it is wise to keep an eye on the future. Puranic literature is not a subject to be checked by logic or evidence. It is especially beneficial to pay attention to the events that happened in these or the events that have been imagined to happen in the future and to take care of oneself on the basis of the incident that happened. Because it has been created to inspire the less educated or uneducated community to do all the deeds related to religion, knowledge, action, policy, character, dignity, good behavior. Those people who have not got the privilege of reading and writing due to certain reasons, those people also listen through satsang, leela, katha, story, to accept the good and take it as right and wrong; This Purana has been composed.
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Veer Hanuman Shabar Mantra

350.00
Veer Hanuman Shabar Mantra published by Randheer Publication
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Kali Vilas Shabar Mantra

250.00
Kali Vilas Shabar Mantra (Sampoorn Dus Bhag)
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Sarvsulabh Gharelu Vastuon se

160.00
यदि समस्याएँ हैं तो उनका कोई न कोई समाधान भी अवश्य है। आवश्यकता बस उस समाधान को खोजने की है। If there are problems, there must be some kind of solution to them. The need is just to find that solution. इस पुस्तक में लेखक ने सरलता से उपलब्ध होने वाली वस्तुओं से तन्त्र के सरल प्रयोग ही पाठकों को बताये हैं। घृणित - घिनौनी या अनर्थ करने वाली क्रियायें इसमें नही हैं। इसलिये इसे जनकल्याण तन्त्र कहा जा सकता है। In this book, the author has told the readers only the simple uses of the system from the easily available items. It does not contain hateful or disgraceful actions. That is why it can be called public welfare system. हमारे जीवन संसार के चारों ओर प्रयोग में आने वाली वस्तुओं, वनस्पतियों और पदार्थों में विलक्षण गुणधर्म प्राकृतिक रूप से समाहित हैं। शंख, गोमतीचक्र कौड़ी, रत्ती, सिन्दूर, गोरोचन, नागकेसर, लौंग, इलायची, अशोक, आम, बरगद, केला आदि वस्तुएँ तथा हाथी, गर्दभ, अश्व, सर्प इत्यादि अनेक जीव जन्तुओं के उचित प्रयोग की बात आती है तो इनके समुचित प्रयोग और तदनुसार इनसे लाभ प्राप्त करने के लिए, गुह्य विद्याओं के बौद्धिक मर्मज्ञ - गोपाल राजू ने ऐसी सर्वसुलभ सामग्री की सरल प्रयोग विधि इस पुस्तक में दी है, जिससे समाज का प्रत्येक वर्ग इससे पूरा - पूरा लाभ उठा सकेगा। प्रयोग में लायी जाने वाली वस्तुओं के लगभग 100 चित्रों सहित पुस्तक आपके हाथ में है। आप अपने सुखी जीवन की संरचना में इससे सहयोग ले सकेंगे। Unique properties are naturally contained in the objects, plants and materials used around our life world. When it comes to the proper use of conch shell, Gomticakra Kauri, Ratti, Sindoor, Gorochan, Nagkesar, Clove, Cardamom, Ashoka, Mango, Banyan, Banana and many other animals like elephant, neck, horse, snake etc., then their proper use and Accordingly, in order to get benefit from them, Gopal Raju, an intellectual penetrator of occult sciences, has given in this book a simple method of using such accessible material, so that every section of the society will be able to take full advantage of it. The book is in your hand with about 100 pictures of used items.
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यदि समस्याएँ हैं तो उनका कोई न कोई समाधान भी अवश्य है। आवश्यकता बस उस समाधान को खोजने की है। If there are problems, there must be some kind of solution to them. The need is just to find that solution. इस पुस्तक में लेखक ने सरलता से उपलब्ध होने वाली वस्तुओं से तन्त्र के सरल प्रयोग ही पाठकों को बताये हैं। घृणित - घिनौनी या अनर्थ करने वाली क्रियायें इसमें नही हैं। इसलिये इसे जनकल्याण तन्त्र कहा जा सकता है। In this book, the author has told the readers only the simple uses of the system from the easily available items. It does not contain hateful or disgraceful actions. That is why it can be called public welfare system. हमारे जीवन संसार के चारों ओर प्रयोग में आने वाली वस्तुओं, वनस्पतियों और पदार्थों में विलक्षण गुणधर्म प्राकृतिक रूप से समाहित हैं। शंख, गोमतीचक्र कौड़ी, रत्ती, सिन्दूर, गोरोचन, नागकेसर, लौंग, इलायची, अशोक, आम, बरगद, केला आदि वस्तुएँ तथा हाथी, गर्दभ, अश्व, सर्प इत्यादि अनेक जीव जन्तुओं के उचित प्रयोग की बात आती है तो इनके समुचित प्रयोग और तदनुसार इनसे लाभ प्राप्त करने के लिए, गुह्य विद्याओं के बौद्धिक मर्मज्ञ - गोपाल राजू ने ऐसी सर्वसुलभ सामग्री की सरल प्रयोग विधि इस पुस्तक में दी है, जिससे समाज का प्रत्येक वर्ग इससे पूरा - पूरा लाभ उठा सकेगा। प्रयोग में लायी जाने वाली वस्तुओं के लगभग 100 चित्रों सहित पुस्तक आपके हाथ में है। आप अपने सुखी जीवन की संरचना में इससे सहयोग ले सकेंगे। Unique properties are naturally contained in the objects, plants and materials used around our life world. When it comes to the proper use of conch shell, Gomticakra Kauri, Ratti, Sindoor, Gorochan, Nagkesar, Clove, Cardamom, Ashoka, Mango, Banyan, Banana and many other animals like elephant, neck, horse, snake etc., then their proper use and Accordingly, in order to get benefit from them, Gopal Raju, an intellectual penetrator of occult sciences, has given in this book a simple method of using such accessible material, so that every section of the society will be able to take full advantage of it. The book is in your hand with about 100 pictures of used items.
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Dhan Prapti Ke Dharmik Anushthan evom Shri Lalita Sahasranam StotraDhan Prapti Ke Dharmik Anushthan evom Shri Lalita Sahasranam Stotra
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Dhan Prapti Ke Dharmik Anushthan evom Shri Lalita Sahasranam Stotra

200.00
महालक्ष्मी की विभिन्न स्तोत्रों से आराधना तथा श्रीसूक्त, महालक्ष्मी सूक्त , देवराज इन्द्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र , महालक्ष्मी अष्टक , कनकधारा स्तोत्र , पुरुष सूक्तम् , धनदा लक्ष्मी स्तोत्रम् , धनदादेवी स्तोत्रम् , धनदा कवचम् , ऋणमोचन , मंगल स्तोत्रम् , ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र , ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र , गणेश स्तवन से लक्ष्मी की वृद्धि कैसे , लक्ष्मी प्राप्ति के कुछ प्रयोग , ऋणमुक्ति के लिए प्रयोग , श्री ललिता सहस्रनाम अर्थात् ' श्री ' तथा ' विद्या ' की देवी के एक हजार नामों की महिमा और दीपावली पूजन , श्रीयन्त्रम् और महालक्ष्मी यन्त्र , कनकधारा यन्त्र इत्यादि इस पुस्तक में संकलित किए गए हैं । Worship of Mahalakshmi with various hymns and Srisukta, Mahalakshmi Sukta, Devraj Indrakrit Lakshmi Stotra, Mahalaxmi Ashtak, Kanakdhara Stotra, Purush Suktam, Dhanda Lakshmi Stotram, Dhanda Devi Stotram, Dhanda Kavacham, Loan Mochan, Ganesh Stotra, Ganesh Stotra, Ganeshi Stotram, Ganeshi Stotra, Mahalaxmi Ashtak, Kanakdhara Stotra, Purush Suktam How to increase Lakshmi by eulogy, Some uses of Lakshmi attainment, Use for liberation from debt, Sri Lalita Sahasranama i.e. glorification of a thousand names of Goddess of 'Shri' and 'Vidya' and Deepawali worship, Sri Yantram and Mahalaxmi Yantra, Kanakdhara Yantra etc. are collected in the book.
Dhan Prapti Ke Dharmik Anushthan evom Shri Lalita Sahasranam StotraDhan Prapti Ke Dharmik Anushthan evom Shri Lalita Sahasranam Stotra
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KAALI KITAB

700.00
TANTRA KI RAHASYAMAYI - KAALI KITAB
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Adbhut Mantra Sagar

450.00
Adbhut Mantra Sagar (Sampoorn Panchon Bhag) Adbhut mantra sagar, this book contains five parts have approx 900 above pages.
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